महिलाओं में हिस्टेरेक्टॉमी का चल रहा ट्रेंड, स्वास्थ्य विशेषज्ञ ने जताई चिंता !

Posted On:Thursday, November 24, 2022

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बुधवार को हिस्टेरेक्टॉमी के बढ़ते चलन पर चिंता जताई। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में बहुत कम उम्र की महिलाओं में भी बड़ी संख्या में हिस्टेरेक्टॉमी हो रही हैं, जो उनके शारीरिक, सामाजिक और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं। अमिता बाली वोहरा, डीडीजी, भारत सरकार ने कहा कि जब महिलाओं के स्वास्थ्य की बात आती है तो परिवार हमारे समाज में मुख्य निर्णयकर्ता होते हैं। इसलिए, महिलाओं को बेहतर चिकित्सा सलाह प्राप्त करने में मदद करने के लिए परिवारों को ऐसे मुद्दों से अवगत कराने की आवश्यकता है। देश में अनावश्यक हिस्टेरेक्टॉमी के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में अमिता बाली वोहरा ने कहा कि ज्यादातर लड़कियां हिस्टेरेक्टॉमी करवाती हैं। उन्हें बाहर निकालो यह महिलाओं को शिक्षित करने और उनका मार्गदर्शन करने के लिए एक मार्गदर्शक होना चाहिए।

यह कार्यक्रम राष्ट्रव्यापी अभियान प्रिजर्व द यूटेरस के हिस्से के रूप में आयोजित किया गया था। इसे अप्रैल में बायर ने फेडरेशन ऑफ ऑब्सटेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटीज ऑफ इंडिया (FOGSI) और IHW काउंसिल के सहयोग से राज्यों में नीतिगत दृष्टिकोण पर ध्यान केंद्रित करते हुए लॉन्च किया था। ताकि महिलाओं के स्वास्थ्य के मुद्दों और स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत किया जा सके और जिन महिलाओं को हिस्टेरेक्टॉमी हुई है उन्हें जागरूक किया जा सके। सेव द वॉम्ब अभियान का मुख्य उद्देश्य महिलाओं और स्त्री रोग के प्रबंधन के आधुनिक और वैकल्पिक तरीकों के बारे में जागरूकता पैदा करना और गर्भाशयोच्छेदन के प्रभाव के बारे में जागरूकता पैदा करना है ताकि महिलाओं को सशक्त बनाया जा सके। रिपोर्ट्स के मुताबिक, महिलाओं के स्वास्थ्य पर सरकार की पहल के बारे में बात करते हुए नीति आयोग के वरिष्ठ सलाहकार के.के. मदन गोपाल ने कहा कि प्रसूति देखभाल से स्त्री रोग देखभाल पर ध्यान केंद्रित करने के लिए काम चल रहा है। यह पिछले कुछ दशकों से सरकार का फोकस क्षेत्र रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक हिस्टेरेक्टॉमी के बाद कई महिलाओं को कमर दर्द, योनि स्राव, कमजोरी, यौन स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कम उम्र में हिस्टेरेक्टॉमी कराने से हृदय रोग, स्ट्रोक और ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा महिलाओं को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी होती हैं। बायर जायडस के प्रबंध निदेशक मनोज सक्सेना ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा में एक प्रमुख हितधारक के रूप में बायर महिलाओं की स्वास्थ्य सेवा में नवाचार के लिए प्रतिबद्ध है। आईएचडब्ल्यू काउंसिल के सीईओ कमल नारायण ने कहा कि वित्तीय लाभ के लिए अपने स्वास्थ्य को खतरे में डालकर महिलाओं के अपने शरीर और स्वास्थ्य के अधिकार की उपेक्षा नहीं की जानी चाहिए। सोशल मीडिया के बढ़ते उपयोग के साथ, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में, इस तरह की पहल स्वास्थ्य जागरूकता को बढ़ावा देने और महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने में काफी मददगार साबित होंगी। एनएफएचएस के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, हिस्टेरेक्टॉमी से गुजरने वाली महिलाओं की औसत आयु 34 वर्ष होने का अनुमान है।


ग्वालियर और देश, दुनियाँ की ताजा ख़बरे हमारे Facebook पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें,
और Telegram चैनल पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें



मेरा गाँव मेरा देश

अगर आप एक जागृत नागरिक है और अपने आसपास की घटनाओं या अपने क्षेत्र की समस्याओं को हमारे साथ साझा कर अपने गाँव, शहर और देश को और बेहतर बनाना चाहते हैं तो जुड़िए हमसे अपनी रिपोर्ट के जरिए. gwaliorvocalsteam@gmail.com

Follow us on

Copyright © 2021  |  All Rights Reserved.

Powered By Newsify Network Pvt. Ltd.